15 लोगों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भूना,कौन थी दस्यु सुंदरी कुसुमा नाइन,

कुसुमा नैन करीब 20 साल से इटावा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रही थी। एक माह पहले तबीयत खराब होने पर उसे इटावा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उसे लखनऊ पीजीआई रेफर किया गया था, जहां उसका लगातार इलाज चल रहा था।
कभी चंबल घाटी में आतंक फैलाने वाली कुख्यात दस्यु सुंदरी कुसुमा नैन की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह इटावा जिला जेल में सजा काट रही थी। पूर्व डकैत कुसुमा नैन ने इलाज के दौरान लखनऊ पीजीआई में अंतिम सांस ली। एक माह पहले तबीयत खराब होने पर उसे इटावा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद कुसुमा को सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी रेफर कर दिया गया था। डॉक्टरों की टीम ने उसे लखनऊ पीजीआई रेफर कर दिया था, जहां उसका लगातार इलाज चल रहा था।
करीब एक माह तक इलाज चलने के बाद कुसुमा की लखनऊ पीजीआई में इलाज के दौरान मौत हो गई बीमारी के चलते उसे इलाज के लिए भेजा गया था, लेकिन पिछले शनिवार को लखनऊ पीजीआई में उसकी मौत हो गई।
20 साल से जेल में थी
कुसमा नैन करीब 20 साल से इटावा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रही थी। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में आतंक का पर्याय रहे कुख्यात डकैत रामआसरे उर्फ फक्कड़ और उसकी सहयोगी पूर्व डकैत सुंदरी कुसमा नैन समेत पूरे गिरोह ने जून 2004 में मध्य प्रदेश के भिंड जिले के दमोह थाने की रावतपुरा चौकी में आत्मसमर्पण कर दिया था। गिरोह के सभी सदस्यों ने भिंड के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक साजिद फरीद शापू के समक्ष बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया था। गिरोह ने उत्तर प्रदेश में 200 से अधिक और मध्य प्रदेश में 35 अपराध किए थे।
यूपी और एमपी पुलिस ने घोषित किया था इनाम
उत्तर प्रदेश पुलिस ने कुसमा नैन पर 20 हजार और मध्य प्रदेश ने 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। कानपुर निवासी फक्कड़ की सहयोगी कुसमा नैन जालौन जिले के सिरसाकलार की रहने वाली है। आत्मसमर्पण करने वाले गिरोह के अन्य सदस्यों में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का राम चंद बाजपेयी, इटावा के संतोष दुबे, कमलेश बाजपेयी, भूरे सिंह यादव और मनोज मिश्रा, कानपुर के कमलेश निषाद और जालौन के भगवान सिंह बघेल शामिल थे, जिसके बाद से वह इटावा जिला जेल में सजा काट रही थी।
फूलन देवी ने 22 लोगों को मारी थी गोली
मई 1981 में फूलन देवी डकैतों लालाराम और श्रीराम से अपने साथ हुए सामूहिक बलात्कार का बदला लेने बेहमई गांव गई थी। वहां दोनों की मुलाकात नहीं हुई, लेकिन फिर भी फूलन ने 22 ठाकुरों को एक लाइन में खड़ा करके गोली मार दी। इस घटना ने पूरे देश में सनसनी मचा दी थी। इस घटना के बाद लालाराम और उसकी प्रेमिका कुसुम बदला लेने के लिए बेताब थे। उधर, बेहमई कांड के एक साल बाद यानी वर्ष 1982 में फूलन ने सरेंडर कर दिया। इस बीच लालाराम और कुसुम का गिरोह सक्रिय रहा।
कुसुम ने लिया बदला, 15 लोगों को मार डाला
1984 में कुसुम ने फूलन देवी के बेहमई हत्याकांड का बदला लिया। फूलन के दुश्मन लालाराम से प्यार करने वाली कुसुम अपने गिरोह के साथ औरैया के आस्ता गांव पहुंची। 15 नाविकों को लाइन में खड़ा कर गोली मार दी गई और उनके घरों में आग लगा दी गई। 1996 में इटावा जिले के बरेह इलाके में कुसुम नैन ने संतोष और राज बहादुर नाम के नाविकों की आंखें फोड़कर उन्हें जिंदा छोड़ दिया था। कुसुम की क्रूरता के कारण डाकू उसे यमुना-चंबल की शेरनी कहने लगे थे।
कुसुमा जिन लोगों का अपहरण करती थी, उनके साथ बेहद बुरा व्यवहार करती थी। चूल्हे से जलती हुई लकड़ी निकालकर उनके शवों को जला देती थी। वह उन्हें जंजीरों में बांधकर कोड़ों से मारती थी। कुसुम नैन की मौत की खबर सुनकर गांव के लोगों ने खुशी जाहिर की।