रूस-यूक्रेन युद्ध समापन की ओर ,पुतिन-जेलेंस्की के सामने ये पांच शर्तें
रूस और यूक्रेन के बीच 30 दिनों के लिए सीमित युद्ध विराम लागू किया गया है, जिसके तहत यूक्रेनी ऊर्जा ठिकानों पर कोई हमला नहीं होगा। हालांकि, स्थायी शांति के लिए पांच शर्तें रखी गई हैं, जिसमें दोनों देश कैदियों की अदला-बदली करेंगे। साथ ही, काला सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमला नहीं किया जाएगा। रूस और यूक्रेन के बीच 30 दिनों के लिए सीमित युद्ध विराम यानी आंशिक युद्ध विराम लागू किया गया है।

रूस ने एक बयान जारी कर कहा है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप से फोन पर बातचीत के बाद 30 दिनों तक यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमला नहीं करने पर सहमति जताई है। हालांकि, इस युद्ध पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए रूस-यूक्रेन के सामने पांच अहम शर्तें रखी गई हैं। इन सभी शर्तों को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को मानना होगा। अमेरिका और रूस के बीच बातचीत के बाद इन शर्तों पर सहमति बनी है। साथ ही, इन समझौतों के तहत युद्ध विराम को प्रभावी बनाने और शांति प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए कई अन्य अहम फैसले लिए गए हैं। 175 कैदियों की होगी अदला-बदली
रूस और यूक्रेन के बीच कैदियों की अदला-बदली पर सहमति बन गई है। दोनों देशों के 175-175 कैदियों को रिहा किया जाएगा। इसके अलावा रूस ने सद्भावना के तौर पर 23 गंभीर रूप से घायल यूक्रेनी सैनिकों को कीव को सौंपने का भी फैसला किया है। इस कदम को शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि कैदियों की रिहाई से दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ेगा और युद्ध विराम के स्थायी समाधान की मजबूत नींव पड़ेगी।
काला सागर में जहाजों पर नहीं होंगे हमले
काला सागर में रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए भी एक अहम फैसला लिया गया है। पुतिन ने सहमति जताई है कि रूस अब काला सागर में व्यापारिक जहाजों या अन्य समुद्री संपत्तियों पर हमला नहीं करेगा। इस फैसले से काला सागर के जरिए वैश्विक व्यापार सुरक्षित होगा और यूक्रेन को जरूरी सामान और सैन्य सहायता की आपूर्ति जारी रह सकेगी।
स्थायी युद्ध विराम पर होगी बातचीत
फिलहाल 30 दिनों के लिए युद्ध विराम लागू किया गया है, लेकिन इसका स्थायी समाधान निकालने के लिए रूस और यूक्रेन के बीच आगे भी गहन बातचीत होगी। इस मुद्दे पर रूस और अमेरिका ने एक संयुक्त विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला किया है, जो युद्ध विराम को स्थायी रूप से लागू करने का समाधान खोजेगी। इस समझौते के तहत यूक्रेन को किसी भी नई सैन्य भर्ती को रोकना होगा और हथियारों की आपूर्ति को भी रोकना होगा।
ऊर्जा समझौते पर काम करेंगे
युद्ध के दौरान रूस और यूक्रेन एक दूसरे के ऊर्जा ढांचे पर हमला करते रहे हैं। अब पुतिन और जेलेंस्की इस बात पर सहमत हुए हैं कि ऊर्जा क्षेत्र पर हमले पूरी तरह से रोक दिए जाएंगे। इस समझौते का उद्देश्य यूक्रेन और रूस दोनों की अर्थव्यवस्था को स्थिर करना और यूरोप में ऊर्जा संकट को कम करना है। रूस और अमेरिका इस मामले में एक दीर्घकालिक ऊर्जा संधि पर काम करेंगे, ताकि भविष्य में भी ऊर्जा क्षेत्र को सुरक्षित रखा जा सके।
शांति समझौते का उल्लंघन नहीं करेंगे
रूस और यूक्रेन दोनों को इस बात पर सहमत होना होगा कि वे इस समझौते का उल्लंघन नहीं करेंगे। अगर कोई भी पक्ष इस संधि का उल्लंघन करता है, तो उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। यह समझौता अस्थायी युद्ध विराम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि पुतिन और जेलेंस्की इन शर्तों को पूरी तरह स्वीकार करते हैं या नहीं और इस युद्ध को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।