IAS पूजा खेडकर के बचाव में पिता बोले- कुछ भी गैरकानूनी काम नहीं किया

Jul 15, 2024 - 07:51
Jul 15, 2024 - 07:52
IAS पूजा खेडकर के बचाव में पिता बोले- कुछ भी गैरकानूनी काम नहीं किया

महाराष्ट्र सरकार के पूर्व कर्मचारी और पूजा के पिता दिलीप खेडकर ने दावा किया है कि वह वास्तव में नॉन क्रीमी लेयर श्रेणी से आते हैं। हालांकि, जब खेडकर ने लोकसभा चुनाव के दौरान अपनी किस्मत आजमाई थी, तब उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में 40 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी।

महाराष्ट्र में अपनी हरकतों से चर्चा में आईं विवादित आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है और उन पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है। उन पर आईएएस बनने के लिए फर्जी विकलांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाण पत्र जमा करने का आरोप है। केंद्र सरकार इस मामले की जांच कर रही है। इस बीच, पूजा के पिता ने यह कहते हुए अपनी बेटी का बचाव किया कि उसने कुछ भी अवैध नहीं किया है।

फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए आईएएस अधिकारी बनने वाली पूजा के पिता ने कल रविवार को कहा कि उसने कुछ भी गलत या अवैध नहीं किया है। दिलीप खेडकर ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर सीमित साधनों वाला कोई व्यक्ति 4 से 5 एकड़ जमीन का मालिक बन जाता है और मूल्यांकन के आधार पर उसकी संपत्ति कई करोड़ रुपये आंकी जाती है, तो यह गलत कैसे है। क्रीमी लेयर का निर्धारण संपत्ति के मूल्यांकन के बजाय आय पर निर्भर करता है।

रिश्तेदार की थी लग्जरी कार: पिता दिलीप

अपनी बेटी के बचाव में उन्होंने कहा, "पूजा ने सरकारी काम के लिए 'लग्जरी' कार का इस्तेमाल किया क्योंकि उसके पास कोई सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं था। उसने ऐसा करने के लिए अपने वरिष्ठों से अनुमति भी मांगी थी। जिस कार की बात हो रही है, वह उसकी नहीं बल्कि उसके किसी रिश्तेदार की है। उसने कार पर लाल बत्ती लगाकर किसी को धोखा नहीं दिया।" पूजा 2022 बैच की महाराष्ट्र कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 841वीं रैंक हासिल की थी। पिछले साल जून में उन्हें प्रोबेशनरी ऑफिसर के तौर पर पुणे भेजा गया था।

पूजा के पिता दिलीप खेडकर, जो महाराष्ट्र सरकार के पूर्व कर्मचारी हैं, ने दावा किया कि वे वास्तव में गैर-क्रीमी लेयर श्रेणी से आते हैं। हालांकि, खेडकर ने पिछले महीने समाप्त हुए लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई थी और अपने चुनावी हलफनामे में उन्होंने 40 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी।

…तो मैं अपनी बेटी को नौकरी से इस्तीफा दिलवा दूंगा

युवा आईएएस अधिकारी पर लगे कई आरोपों में से एक यह भी है कि जब एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूजा को अपने कार्यालय के रूप में एक कमरे का उपयोग करने की अनुमति दी, तो उसने पुणे कार्यालय में उस वरिष्ठ अधिकारी की नेमप्लेट भी हटा दी। इस पर दिलीप कहते हैं, "पूजा ने अपने वरिष्ठ अधिकारी से अनुमति लेने के बाद ही उनके केबिन का उपयोग किया। क्या कहीं ऐसा लिखा है कि एक युवा 'इंटर्न' आईएएस अधिकारी को अलग केबिन नहीं दिया जाना चाहिए? अगर ऐसा लिखा है, तो मैं उसे नौकरी से इस्तीफा दिलवा दूंगा।"

विकलांगता प्रमाण पत्र के दुरुपयोग के आरोपों पर सफाई देते हुए दिलीप खेडकर ने कहा कि सरकार एक मानक तय करती है, ताकि किसी की विकलांगता का निर्धारण किया जा सके। उनकी बेटी विकलांगता से जुड़े सभी मानदंडों को पूरा करती है।

पूजा हाल ही में अचानक चर्चा में आईं, जब उन्होंने कथित तौर पर पुणे में अपनी पोस्टिंग के दौरान एक अलग केबिन और स्टाफ की मांग की, जिसके कारण उनका पुणे से वाशिम जिले में तबादला कर दिया गया। इतना ही नहीं, उन पर क्रीमी लेयर (8 लाख रुपये से कम वार्षिक आय) और दृष्टिबाधित श्रेणी के तहत सिविल सेवा परीक्षा देकर और मानसिक बीमारी का प्रमाण पत्र जमा करके आईएएस में जगह पाने का आरोप था।

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